टाइप-2 डायबिटीज के कुछ मरीजों के लिए मेटाबॉलिक सर्जरी हो सकती है विकल्प: AIIMS डॉक्टर
टाइप-2 डायबिटीज के कुछ मरीजों के लिए मेटाबॉलिक सर्जरी हो सकती है विकल्प: AIIMS डॉक्टर
दवाओं और लाइफस्टाइल बदलाव से शुगर कंट्रोल न होने पर सर्जरी पर किया जा सकता है विचार
नई दिल्ली: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के वरिष्ठ चिकित्सक ने कहा है कि मेटाबॉलिक सर्जरी टाइप-2 डायबिटीज के कुछ चुनिंदा मरीजों में ब्लड शुगर को बेहतर तरीके से नियंत्रित करने में मदद कर सकती है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि इसे हर डायबिटीज मरीज के लिए सामान्य उपचार नहीं माना जाना चाहिए।
सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. मंजूनाथ मारुति के अनुसार, कुछ मरीजों में दवाओं और जीवनशैली में बदलाव से ही मधुमेह नियंत्रित हो जाती है। लेकिन ऐसे मरीज जिनकी बीमारी उचित मेडिकल उपचार के बावजूद नियंत्रित नहीं होती, उनके लिए मेटाबॉलिक सर्जरी एक साक्ष्य-आधारित उपचार विकल्प हो सकती है।
किन मरीजों में सर्जरी पर विचार?
डॉ. मंजूनाथ ने बताया कि मेटाबॉलिक सर्जरी पर तब विचार किया जा सकता है जब:
मरीज को कम से कम दो वर्षों से टाइप-2 डायबिटीज हो।
तीन से अधिक ओरल एंटी-डायबिटिक दवाओं के बावजूद HbA1c 7.5 प्रतिशत से ऊपर बना रहे।
दवाओं और जीवनशैली में बदलाव के बावजूद ब्लड शुगर पर्याप्त रूप से नियंत्रित न हो।
मरीज को इंसुलिन की सलाह दी गई हो या इंसुलिन शुरू करने की जरूरत पड़ गई हो।
उन्होंने कहा कि हर मरीज की स्थिति अलग होती है और सर्जरी का फैसला विशेषज्ञ चिकित्सकीय मूल्यांकन के बाद ही किया जाना चाहिए।
लंबे समय के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है असर
डॉ. मंजूनाथ के मुताबिक, मेटाबॉलिक सर्जरी की शुरुआती लागत की तुलना अनियंत्रित डायबिटीज से होने वाले लंबे समय के स्वास्थ्य और आर्थिक बोझ से की जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी उपचार इस बात की गारंटी नहीं दे सकता कि भविष्य में डायबिटीज की जटिलताएं बिल्कुल नहीं होंगी। हालांकि, मेटाबॉलिक स्वास्थ्य में लगातार सुधार से बीमारी और उससे जुड़ी जटिलताओं के दीर्घकालिक बोझ को कम करने में मदद मिल सकती है।
महत्वपूर्ण: मेटाबॉलिक सर्जरी सभी टाइप-2 डायबिटीज मरीजों के लिए उपयुक्त नहीं होती। सर्जरी पर निर्णय मरीज की उम्र, वजन, HbA1c, दवाओं की प्रतिक्रिया और अन्य स्वास्थ्य कारकों को देखते हुए विशेषज्ञ चिकित्सक द्वारा किया जाना चाहिए।







