बिना सलाह आदेश जारी, नागरिक बोले- सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी, बोझ हम पर क्यों?
नागरिकों की मांग: 8 जुलाई 2026 को जारी CCTV आदेश रद्द किया जाए:
छत्रपती संभाजीनगर के पुलिस आयुक्त द्वारा 8 जुलाई 2026 को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत जारी आदेश के खिलाफ जनता में जबरदस्त विरोध है। इस आदेश में CCTV लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।
आदेश के दायरे में कौन-कौन आएगा:
इस आदेश के तहत इन सभी जगहों पर CCTV लगाना अनिवार्य होगा:
बैंक, ATM, वित्तीय संस्थान, ज्वेलरी की दुकानें, होटल, गेस्ट हाउस, रेस्टोरेंट, बार, पब, वाइन और बीयर शॉप, आवासीय टावर, ऑफिस बिल्डिंग, नई बिल्डिंग, पेट्रोल पंप, शॉपिंग मॉल, सुपरमार्केट, जिम, स्टेडियम, सिनेमा हॉल, शिक्षण संस्थान, धार्मिक स्थल, अस्पताल और विभिन्न ट्रस्ट व संगठन।
इससे हजारों व्यापारियों, संस्थाओं और आम नागरिकों पर _करोड़ों रुपये का आर्थिक बोझ पड़ेगा।
प्रमुख आपत्तियां:
संवैधानिक जिम्मेदारी बनाम निजी बोझ:
कानून-व्यवस्था बनाए रखना राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी है। इस वित्तीय बोझ को निजी नागरिकों, व्यापारियों और संस्थाओं पर डालना उचित नहीं है।
धारा 163 BNSS का दुरुपयोग: धारा 163 अस्थायी आपातकालीन स्थितियों के लिए है। इसका इस्तेमाल सामान्य प्रशासनिक पाबंदियां लगाने के लिए करना अधिकारों का अतिक्रमण है।
60 दिन का आदेश, करोड़ों का खर्च
यह आदेश सिर्फ 60 दिनों के लिए वैध है। अगर CCTV सार्वजनिक सुरक्षा के लिए जरूरी है, तो राज्य सरकार को स्थायी नीति बनाकर खुद फंड करना चाहिए।
छोटे व्यापारियों के लिए इतने कम समय में CCTV लगाना, उसका रखरखाव, 15 दिन का फुटेज स्टोर करना और 50 मीटर का दायरा कवर करना आर्थिक रूप से असंभव है।
आदेश न मानने पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223_ के तहत FIR हो सकती है - यह एक संज्ञेय अपराध है जिसमें बिना वारंट गिरफ्तारी और 6 महीने तक जेल का प्रावधान है। इससे नागरिकों में डर का माहौल है।
कोई सलाह-मशविरा नहीं :
यह आदेश व्यापार संघों, उद्योग संगठनों, शैक्षणिक, धार्मिक या नागरिक संगठनों से चर्चा किए बिना जारी किया गया।
व्यावसायिक लाभ के आरोप:
सरकारी खर्च पर चौराहों और संवेदनशील इलाकों में CCTV लगाने के बजाय सारा वित्तीय बोझ निजी संस्थानों पर डाल दिया गया। इससे CCTV उद्योग को सैकड़ों करोड़ का फायदा पहुंचने की आशंका और संदेह पैदा हुआ है।
नागरिकों और संगठनों की मांग:
8 जुलाई 2026 के आदेश को तुरंत रद्द किया जाए।
आदेश की कानूनी वैधता की उच्च-स्तरीय जांच हो।
भविष्य में कोई नीति बनाने से पहले सभी हितधारकों से सलाह ली जाए।
अगर सार्वजनिक सुरक्षा के लिए जरूरी है तो राज्य सरकार द्वारा फंडेड CCTV योजना बनाई जाए।
जनता का रुख:
"लोकतंत्र में सार्वजनिक सुरक्षा सरकार का विषय है। हम नागरिकों की जेब पर बोझ डालकर 'पुलिस राज' बनाने का कोई भी प्रयास स्वीकार नहीं करेंगे। प्रशासन को जनहित, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करना चाहिए।"





