होर्मुज स्ट्रेट संकट: ब्रिटेन की बैठक विफल, ईरान को मनाना मुश्किल

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ब्रिटेन की 40 देशों की बैठक बेनतीजा रही। पूर्व राजनयिक केपी फाबियन के अनुसार ईरान की सुरक्षा गारंटी की मांग पूरी करना लगभग असंभव है।

होर्मुज स्ट्रेट संकट: ब्रिटेन की बैठक विफल, ईरान को मनाना मुश्किल
होर्मुज स्ट्रेट संकट: ब्रिटेन की बैठक विफल, ईरान को मनाना मुश्किल

होर्मुज जलडमरूमध्य पर वैश्विक गतिरोध बरकरार

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और इजराइल-ईरान युद्ध की आहट के बीच, ब्रिटेन ने 40 देशों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की। इस बैठक का मुख्य केंद्र होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को खुला रखना था, ताकि वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित न हो। हालांकि, लंबी चर्चा के बावजूद इस संकट का कोई ठोस हल नहीं निकल सका।

केपी फाबियन का बड़ा बयान: ईरान की शर्तें मुश्किल

भारत के पूर्व राजनयिक केपी फाबियन ने इस स्थिति पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान जो सुरक्षा और संप्रभुता की गारंटी मांग रहा है, वह कोई भी पश्चिमी देश देने की स्थिति में नहीं है। फाबियन के अनुसार, ईरान का कड़ा रुख ब्रिटेन और उसके सहयोगियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल आपूर्ति पर संकट

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल गलियारा है। यदि ईरान इसे बंद करने का निर्णय लेता है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हो सकती है। ब्रिटेन की बैठक का विफल होना यह दर्शाता है कि कूटनीतिक रास्ते बंद होते जा रहे हैं।

आगे की राह: युद्ध या समझौता?

अमेरिका और इजराइल लगातार ईरान पर दबाव बना रहे हैं, लेकिन ईरान झुकने को तैयार नहीं है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि बिना किसी ठोस समझौते के होर्मुज स्ट्रेट में तनाव कम होना नामुमकिन है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें ईरान के अगले कदम और क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों पर टिकी हैं।