ईरान युद्ध: पाकिस्तान में ऊर्जा संकट, केरोसीन ₹433, जेट फ्यूल रिकॉर्ड स्तर पर
ईरान युद्ध के बीच पाकिस्तान गहरे ऊर्जा संकट से जूझ रहा है। केरोसीन 433.40 रु/लीटर और जेट फ्यूल 476.97 रु/लीटर पर पहुंचा, जिससे हवाई किराया बढ़ा और आम जनता पर बोझ पड़ा।
ईरान और इज़रायल के बीच चल रहे तनाव ने वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजारों को हिला दिया है, जिसका सबसे बुरा असर उन देशों पर पड़ रहा है जिनकी अर्थव्यवस्था पहले से ही नाजुक है। इनमें से एक देश है पाकिस्तान, जो इस भू-राजनीतिक उथल-पुथल के कारण एक गंभीर ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है। देश में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे आम जनता का जीवन और भी कठिन हो गया है।
पाकिस्तान में केरोसीन और जेट फ्यूल की रिकॉर्ड कीमतें
हालिया आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान में केरोसीन की कीमत 433.40 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गई है, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। यह उन लोगों के लिए एक बड़ी चुनौती है जो ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में खाना पकाने, रोशनी करने और हीटिंग के लिए केरोसीन पर निर्भर करते हैं। इसी तरह, जेट फ्यूल की कीमतें भी अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गई हैं, जो अब 476.97 रुपए प्रति लीटर पर बिक रहा है। यह वृद्धि सीधे तौर पर वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और ईरान युद्ध के कारण बढ़ती अनिश्चितता का परिणाम है।
हवाई किराए पर सीधा असर
जेट फ्यूल की कीमतों में इस भारी बढ़ोतरी का सीधा असर हवाई यात्रा पर पड़ रहा है। एयरलाइन कंपनियों की परिचालन लागत में जबरदस्त वृद्धि हुई है, जिसके परिणामस्वरूप हवाई किराए में भी भारी इजाफा किया गया है। इससे न केवल घरेलू हवाई यात्रा महंगी हुई है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी इसका असर दिख रहा है, जिससे व्यापार, पर्यटन और विदेशी मुद्रा आवक पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है। आम नागरिक और व्यवसायी दोनों ही इस बढ़े हुए बोझ तले दब रहे हैं।
आम जनता पर चौतरफा मार
केरोसीन की ऊंची कीमतें आम पाकिस्तानी नागरिकों के लिए एक बड़ा संकट बन गई हैं। घरों में खाना पकाने, रोशनी करने और हीटिंग के लिए केरोसीन का इस्तेमाल करने वाले लाखों परिवार अब इसे खरीदने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं। विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां बिजली या गैस की आपूर्ति अनियमित है, केरोसीन जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा है। इस महंगाई ने लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे उनके मासिक बजट पर भारी दबाव पड़ रहा है और गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों की संख्या बढ़ने का खतरा है।
यह ऊर्जा संकट पाकिस्तान की पहले से ही कमजोर अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ डाल रहा है। आयात बिल में वृद्धि, औद्योगिक उत्पादन पर असर और बढ़ती महंगाई का यह चक्र देश को और गहरे आर्थिक अस्थिरता की ओर धकेल रहा है। सरकार के लिए इस चुनौती से निपटना और आम जनता को राहत प्रदान करना एक बड़ी परीक्षा बन गया है।









