NATO ने छोड़ा अमेरिका का साथ, होर्मुज में भारतीय टैंकरों का जलवा

ईरान-अमेरिका तनाव के बीच नाटो ने वॉशिंगटन का साथ छोड़ा। होर्मुज में ईरान के दबदबे के बावजूद भारतीय झंडे लगे टैंकर शान से निकल रहे हैं।

NATO ने छोड़ा अमेरिका का साथ, होर्मुज में भारतीय टैंकरों का जलवा
NATO ने छोड़ा अमेरिका का साथ, होर्मुज में भारतीय टैंकरों का जलवा

ईरान-अमेरिका युद्ध: होर्मुज में बदली जंग की दिशा

अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमले के 19 दिन बीत चुके हैं, लेकिन पश्चिम एशिया में शांति के कोई आसार नहीं दिख रहे हैं। सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के निधन के बाद भी ईरान ने झुकने के बजाय अपनी आक्रामकता बढ़ा दी है। सबसे चौंकाने वाला मोड़ सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट में आया है, जहाँ ईरान ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर कड़ा नियंत्रण कर लिया है।

नाटो सहयोगियों ने झाड़ा पल्ला, अमेरिका हुआ अलग-थलग

वॉशिंगटन के लिए सबसे बड़ी कूटनीतिक विफलता उसके अपने सहयोगियों का साथ छोड़ना रही है। ईरान के साथ बढ़ते युद्ध के खतरों को देखते हुए नाटो (NATO) देशों ने इस अभियान से दूरी बना ली है। अब अमेरिका के पास इजरायल के अलावा कोई मजबूत सैन्य साझेदार नहीं बचा है। इस अलगाव ने अमेरिका को होर्मुज के संकटपूर्ण जलक्षेत्र में फंसा दिया है, जहाँ ऊर्जा की वैश्विक सप्लाई लाइन ईरान के निशाने पर है।

भारतीय तिरंगे की ताकत: सुरक्षित गुजर रहे टैंकर

इस भीषण तनाव के बीच एक सुखद तस्वीर सामने आई है। जहाँ दुनिया भर के जहाज इस रास्ते से गुजरने में कतरा रहे हैं, वहीं भारतीय झंडे लगे टैंकर शान से होर्मुज स्ट्रेट पार कर रहे हैं। ईरान की ओर से भारतीय टैंकरों को कोई नुकसान नहीं पहुँचाया जा रहा है, जो भारत की तटस्थ और मजबूत विदेश नीति का प्रमाण है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने रणनीतिक रूप से भारत जैसे देशों के हितों को सुरक्षित रखा है ताकि वैश्विक दबाव को संतुलित किया जा सके।

वैश्विक ऊर्जा संकट का मंडराता खतरा

ईरान द्वारा होर्मुज की घेराबंदी से पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट गहराने की आशंका है। अमेरिका और इजरायल अब भी ईरान में सत्ता परिवर्तन (Regime Change) की कोशिशों में जुटे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि ईरान ने इस युद्ध की बाजी पलट दी है। नाटो के समर्थन के बिना अमेरिका के लिए इस समुद्री रास्ते को सुरक्षित रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है।