शिक्षक को राहत, हाईकोर्ट ने कहा अधिकारियों को 'सस्पेंशन सिंड्रोम'

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने वीडियो शेयर करने पर सस्पेंड हुए शिक्षक को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने अधिकारियों की आदतों पर 'सस्पेंशन सिंड्रोम' जैसे कड़े शब्दों का प्रयोग किया।

शिक्षक को राहत, हाईकोर्ट ने कहा अधिकारियों को 'सस्पेंशन सिंड्रोम'
शिक्षक को राहत, हाईकोर्ट ने कहा अधिकारियों को 'सस्पेंशन सिंड्रोम'

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में एक सरकारी शिक्षक के निलंबन आदेश पर रोक लगाते हुए प्रशासनिक अधिकारियों के रवैये पर बेहद तल्ख टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों में ‘सस्पेंशन सिंड्रोम’ घर कर गया है, जिसके तहत वे बिना सोचे-समझे छोटी-छोटी बातों पर कर्मचारियों को निलंबित कर रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?

मामला एक सरकारी शिक्षक से जुड़ा है, जिन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया था। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने इसे सेवा नियमों का उल्लंघन और अनुशासनहीनता मानते हुए शिक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। इस आदेश के खिलाफ शिक्षक ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि निलंबन का उपयोग अंतिम विकल्प के रूप में किया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति ने टिप्पणी की कि वर्तमान में अधिकारियों के बीच एक प्रवृत्ति बन गई है कि वे किसी भी बात पर सीधे निलंबन की कार्रवाई करते हैं, जिसे उन्होंने ‘सस्पेंशन सिंड्रोम’ करार दिया।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना पर्याप्त आधार और गंभीर कारण के किसी कर्मचारी की जीविका और सम्मान पर प्रहार करना गलत है। हाईकोर्ट ने शिक्षक के निलंबन पर अंतरिम रोक लगाते हुए विभाग को नोटिस जारी किया है। इस फैसले ने उन कर्मचारियों को बड़ी उम्मीद दी है जो अक्सर अधिकारियों की मनमानी का शिकार होते हैं।