मुंबई एयरपोर्ट नमाज़ विवाद: महाराष्ट्र सरकार ने सुरक्षा जोखिम बताया

महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट को बताया कि सुरक्षा कारणों से मुंबई एयरपोर्ट के पास मुस्लिम टैक्सी ड्राइवरों को नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने वैकल्पिक व्यवस्था का सुझाव दिया।

मुंबई एयरपोर्ट नमाज़ विवाद: महाराष्ट्र सरकार ने सुरक्षा जोखिम बताया
मुंबई एयरपोर्ट नमाज़ विवाद: महाराष्ट्र सरकार ने सुरक्षा जोखिम बताया

मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट को सूचित किया है कि वह छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (CSMIA) के घरेलू टर्मिनल के पास एक अस्थायी शेड में ऑटो-टैक्सी और ओला-उबर कैब चालकों को नमाज़ अदा करने की अनुमति नहीं दे सकती है। सरकार ने इस कदम के पीछे 'सुरक्षा' कारणों का हवाला दिया है, भले ही यह पवित्र रमजान महीने के दौरान की बात हो।

सुरक्षा कारणों का हवाला

गुरुवार को न्यायमूर्ति बर्गेस कोलाबावाला और न्यायमूर्ति नील गोखले की खंडपीठ के समक्ष महाराष्ट्र सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि हवाई अड्डे जैसे संवेदनशील स्थान के पास इस तरह की अनुमति देना सुरक्षा के दृष्टिकोण से उचित नहीं है। सरकार का तर्क है कि इससे सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लग सकती है, खासकर ऐसे समय में जब हवाई अड्डों पर उच्च सतर्कता बरती जाती है।

उच्च न्यायालय का हस्तक्षेप और वैकल्पिक व्यवस्था का सुझाव

सरकारी वकील अरुणा पई ने अदालत को बताया कि सरकार इस मामले पर विचार कर रही है और ड्राइवरों को नमाज़ अदा करने के लिए हवाई अड्डे के परिसर से बाहर किसी उपयुक्त वैकल्पिक स्थान की तलाश की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार जल्द ही इस संबंध में कोई समाधान निकालेगी। न्यायमूर्ति कोलाबावाला ने इस बात पर जोर दिया कि एक धर्मनिरपेक्ष राज्य होने के नाते, सरकार को ऐसे मामलों में संवेदनशील होना चाहिए और एक स्वीकार्य समाधान खोजना चाहिए। उन्होंने कहा, "आप (सरकार) एक वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं कर सकते? आप उन्हें (ड्राइवरों को) हवाई अड्डे के परिसर से बाहर कहीं नमाज़ अदा करने की अनुमति दे सकते हैं।"

ड्राइवरों की याचिका और रमजान का महत्व

यह मुद्दा तब उठा जब कुछ ऑटो-टैक्सी और कैब चालकों ने नमाज़ अदा करने की अनुमति के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। उनकी दलील थी कि वे लंबे समय तक हवाई अड्डे के आसपास रहते हैं और उन्हें अपनी धार्मिक प्रथाओं का पालन करने के लिए एक उचित स्थान की आवश्यकता है, खासकर रमजान के दौरान, जब नमाज़ और इबादत का विशेष महत्व होता है। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि वर्षों से वे इस स्थान का उपयोग करते आ रहे हैं और अब अचानक इसे बंद करने से उन्हें असुविधा हो रही है।

आगे की राह

अदालत ने सरकार को इस मामले में तेज़ी से कार्रवाई करने और ड्राइवरों के लिए एक उपयुक्त वैकल्पिक स्थान खोजने का निर्देश दिया है। इस मामले में अगली सुनवाई जल्द ही होने की उम्मीद है, जहां सरकार को अपने द्वारा किए गए इंतजामों के बारे में अदालत को सूचित करना होगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि महाराष्ट्र सरकार सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखते हुए किस तरह का समाधान प्रस्तुत करती है जो मुस्लिम ड्राइवरों की धार्मिक आवश्यकताओं को भी पूरा कर सके।