"छत्रपति संभाजीनगर विवाद: शिरसाट और जलील आमने-सामने, कोर्ट में 20 मिनट तक हुई बहस"
"संजय शिरसाट vs इम्तियाज जलील: कोर्ट में दोनों ने खुद रखे दमदार तर्क, मामले को मिला नया मोड".
छत्रपति संभाजीनगर :महाराष्ट्र के समाज कल्याण मंत्री संजय शिरसाट और AIMIM के पूर्व सांसद इम्तियाज जलील के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद में अब नया मोड़ आ गया है। दोनों ने हाल ही में कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होकर दमदार तर्क रखे।
क्या है पूरा मामला?
दोनों नेताओं के बीच टकराव की शुरुआत निदा खान मामले के बाद तेज हो गई थी।
शिरसाट के आरोप: मंत्री संजय शिरसाट ने आरोप लगाया कि नासिक TCS धर्मांतरण मामले की आरोपी निदा खान को 43 दिनों तक AIMIM ने छत्रपति संभाजीनगर में छिपाकर रखा। उन्होंने दावा किया कि AIMIM के पार्षद मतीन पटेल ने मदद की और इस पूरे रैकेट के पीछे इम्तियाज जलील "मुख्य दोषी" हैं। शिरसाट ने इस मामले की जांच के लिए SIT गठित करने और जलील को गिरफ्तार करने की मांग भी की।
जलील का पलटवार: इम्तियाज जलील ने शिरसाट पर आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि शिरसाट के 2019 के शपथपत्र में संपत्ति कुछ और थी, जबकि 2024 में वह कई गुना बढ़ गई। जलील ने शेंद्रा MIDC में शिरसाट के बेटे सिद्धांत को कम कीमत पर जमीन देने का मुद्दा भी उठाया और इस मामले में ED, CBI और आयकर विभाग से जांच की मांग की।
कोर्ट में क्या हुआ?
छत्रपति संभाजीनगर में भूमि विवाद से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान पूर्व सांसद इम्तियाज जलील पार्टी इन पर्सन के रूप में कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने करीब 20 मिनट तक खुद युक्तिवाद किया।सुनवाई के दौरान उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला दिया और कहा कि शिकायतों में उनके धर्म का उल्लेख दुर्भावनापूर्ण मंशा दर्शाता है।
सरकारी वकील ने अदालत से कहा कि शिकायतकर्ता का पक्ष सुने बिना कोई निर्णय न लिया जाए। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 21 फरवरी को तय की है।
राजनीतिक गर्मी:
इसके अलावा शिरसाट ने BMC चुनावों में AIMIM के 'पतंग' चुनाव चिन्ह पर बैन लगाने की मांग भी की थी, जिसे जलील ने "हास्यास्पद" बताया था। फिलहाल दोनों नेताओं के आरोप-प्रत्यारोप से छत्रपति संभाजीनगर की राजनीति गर्म है और मामला अब कोर्ट में भी पहुंच गया है।
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