AI समिट केस: उदय चिब समेत 8 गिरफ्तार, IYC अध्यक्ष हिरासत में

दिल्ली पुलिस ने AI इंपैक्ट समिट में शर्टलेस प्रदर्शन मामले में इंडियन यूथ कांग्रेस अध्यक्ष उदय भानु चिब को गिरफ्तार किया। अब तक कुल 8 गिरफ्तारियां।

AI समिट केस: उदय चिब समेत 8 गिरफ्तार, IYC अध्यक्ष हिरासत में
AI समिट केस: उदय चिब समेत 8 गिरफ्तार, IYC अध्यक्ष हिरासत में (Patrika)

नई दिल्ली: भारत मंडपम में आयोजित एआई इंपैक्ट समिट के दौरान हुए शर्टलेस प्रदर्शन के मामले में दिल्ली पुलिस ने आज एक बड़ी कार्रवाई करते हुए इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) के अध्यक्ष उदय भानु चिब को हिरासत में ले लिया है। इस मामले में अब तक की यह सबसे बड़ी गिरफ्तारी मानी जा रही है। चिब की गिरफ्तारी के साथ ही इस केस में कुल गिरफ्तारियों की संख्या बढ़कर आठ हो गई है, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, उदय भानु चिब को दिल्ली में उनके आवास से हिरासत में लिया गया। उन पर एआई इंपैक्ट समिट के दौरान विरोध प्रदर्शन आयोजित करने और उसमें शामिल होने का आरोप है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब दिल्ली पुलिस इस मामले की गहनता से जांच कर रही है और प्रदर्शन में शामिल अन्य लोगों की तलाश कर रही है।

क्या था मामला?

हाल ही में भारत मंडपम में आयोजित एआई इंपैक्ट समिट एक महत्वपूर्ण वैश्विक आयोजन था, जहां दुनिया भर के नेता और विशेषज्ञ एआई के भविष्य पर चर्चा करने के लिए एकत्रित हुए थे। इसी दौरान, कुछ प्रदर्शनकारियों ने शर्ट उतारकर विरोध प्रदर्शन किया था, जिससे कार्यक्रम में असहज स्थिति पैदा हो गई थी। इस घटना को दिल्ली पुलिस ने गंभीरता से लिया और तब से ही मामले की जांच जारी है।

पुलिस ने इस प्रदर्शन को सार्वजनिक व्यवस्था का उल्लंघन और सरकारी कार्यक्रम में बाधा डालने का प्रयास माना है। शुरुआती गिरफ्तारियों के बाद, जांच की कड़ी अब उदय भानु चिब तक पहुंच गई है, जो इंडियन यूथ कांग्रेस जैसे एक प्रमुख राजनीतिक युवा संगठन के अध्यक्ष हैं।

आगे की राह

उदय भानु चिब की गिरफ्तारी निश्चित रूप से इंडियन यूथ कांग्रेस और मुख्य विपक्षी दल के लिए एक झटका है। उम्मीद है कि इस मामले में और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं क्योंकि पुलिस प्रदर्शन के पीछे के पूरे नेटवर्क और उसे आयोजित करने वाले मास्टरमाइंड तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी आनी शुरू हो गई हैं, जहां विपक्ष इस कार्रवाई को 'लोकतांत्रिक आवाज़ दबाने' का प्रयास बता रहा है, वहीं सत्ता पक्ष इसे 'कानून का राज' स्थापित करने की दिशा में आवश्यक कदम बता रहा है।

दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कानून का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, भले ही उनकी राजनीतिक संबद्धता कुछ भी हो। इस मामले पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं कि आगे और क्या मोड़ आते हैं।