ईरान तनाव के बीच चीन के गुप्त परमाणु परीक्षण का खुलासा, US ने मांगी मदद
अमेरिका के सहायक विदेश मंत्री ने चीन द्वारा किए गए गुप्त परमाणु परीक्षणों का खुलासा किया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से चीन व रूस पर दबाव बनाने का आग्रह किया। यह खुलासा ईरान-अमेरिका तनाव के बीच हुआ।
जिनेवा: अमेरिका ने ईरान के साथ जारी तनाव के बीच एक बड़ा खुलासा करते हुए चीन के गुप्त परमाणु परीक्षणों पर से पर्दा उठाया है। सोमवार को अमेरिका के शस्त्र नियंत्रण और अप्रसार ब्यूरो के सहायक विदेश मंत्री क्रिस्टोफर यिआव ने लगभग छह साल पहले चीन द्वारा किए गए एक गोपनीय परमाणु परीक्षण के बारे में नई जानकारी साझा की। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया है कि वे चीन और रूस पर परमाणु निरस्त्रीकरण की दिशा में कदम उठाने का दबाव बनाएं। यह खुलासा ऐसे नाज़ुक समय पर आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर है।
खत्म हुआ परमाणु समझौता, दुनिया की चिंता बढ़ी
यिआव ने यह महत्वपूर्ण जानकारी तब साझा की, जब इस महीने अमेरिका और रूस के बीच आखिरी परमाणु हथियार समझौते की अवधि समाप्त हो गई है। इस समझौते की समाप्ति के बाद दुनिया की दो सबसे बड़ी परमाणु शक्तियों, अमेरिका और रूस, के हथियारों पर लगी सीमाएं अब खत्म हो गई हैं। संयुक्त राष्ट्र समर्थित एक संस्था के सम्मेलन को संबोधित करते हुए यिआव ने चीन से अधिक पारदर्शिता की मांग की।
'न्यू स्टार्ट' संधि की कमियाँ और चीन का विस्तार
यिआव ने 'न्यू स्टार्ट' संधि की कुछ कमियों की ओर इशारा किया, जिसमें रूस के गैर-रणनीतिक परमाणु हथियारों के विशाल भंडार का समाधान न होना भी शामिल है। उन्होंने जोर देकर कहा, "लेकिन शायद इसकी सबसे बड़ी कमी यह थी कि 'न्यू स्टार्ट' संधि ने चीन द्वारा अभूतपूर्व, सुनियोजित और गुप्त रूप से तैयार किए गए परमाणु हथियारों को ध्यान में नहीं रखा।"
अमेरिका ने चीन पर जानबूझकर और बेरोक-टोक अपने परमाणु हथियार भंडार में भारी विस्तार करने का आरोप लगाया है, जबकि चीन ने ऐसा न करने का आश्वासन दिया था। यिआव ने चीन के 'लक्ष्य' या उद्देश्यों के बारे में पारदर्शिता की कमी पर खेद व्यक्त किया। उन्होंने कहा, "हम मानते हैं कि चीन अगले चार या पांच साल में बराबरी हासिल कर सकता है।"
कूटनीतिक प्रयास और अंतरराष्ट्रीय दबाव की मांग
सोमवार को जिनेवा में यिआव ने एक रूसी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की, और मंगलवार को वे चीनी व अन्य प्रतिनिधिमंडलों से मिलने वाले हैं। अमेरिकी अधिकारी पहले ही अपने साझेदारों, जिनमें परमाणु हथियार संपन्न फ्रांस और ब्रिटेन शामिल हैं, के साथ कई दौर की बैठकें कर चुके हैं। अमेरिका चाहता है कि वैश्विक समुदाय चीन और रूस पर परमाणु निरस्त्रीकरण की दिशा में गंभीर कदम उठाने का दबाव बनाए।
ईरान से जारी है तनाव, सैन्य कार्रवाई की आशंका
एक ओर परमाणु हथियारों को लेकर चीन पर आरोप लग रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार गहराता जा रहा है। सैन्य कार्रवाई की आशंका के बीच अमेरिका ने लेबनान में तैनात अपने गैर-जरूरी राजनयिकों और उनके परिवार के सदस्यों को वापस आने का आदेश दिया है। इसके अतिरिक्त, विदेश मंत्री मार्को रुबियो इस सप्ताहांत इजराइल की अपनी पूर्व निर्धारित यात्रा स्थगित कर सकते हैं, जो क्षेत्र में बढ़ते तनाव का संकेत है।
ईरान से तीसरे दौर की वार्ता
इन सब के बीच, ओमान के विदेश मंत्री सैयद बद्र बिन हमद बिन हमूद अलबुसैदी ने घोषणा की है कि अमेरिका-ईरान वार्ता का अगला (तीसरा) दौर गुरुवार को जिनेवा में होगा। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इरना के अनुसार, रविवार को ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के महानिदेशक राफेल ग्रोसी के बीच फोन पर बातचीत हुई थी। इन वार्ताओं से तनाव कम होने की उम्मीद है, लेकिन चीन के परमाणु रहस्योद्घाटन ने वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य को और जटिल बना दिया है।









