HPV Vaccine Myths & Facts: क्या एचपीवी वैक्सीन से लड़कियां बांझपन का शिकार हो सकती हैं? जानें पूरा सच
भारत सरकार लड़कियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाने के लिए मुफ्त HPV वैक्सीन दे रही है। लेकिन सोशल मीडिया पर बांझपन जैसी अफवाहें फैल रही हैं। आइए तथ्यों और रिसर्च के आधार पर एचपीवी वैक्सीन का सच जानते हैं।
New Delhi: सर्वाइकल कैंसर (Cervical Cancer) यानी गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर से लाखों लड़कियों की जान बचाने के लिए भारत सरकार ने देशव्यापी स्तर पर मुफ्त एचपीवी (HPV) टीकाकरण अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान के तहत 9 से 14 साल की लड़कियों को मुफ्त वैक्सीन दी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी देशवासियों से अपनी बेटियों को यह सुरक्षा कवच पहनाने की अपील कर चुके हैं।
लेकिन, किसी भी बड़े अभियान की तरह इस वैक्सीन को लेकर भी सोशल मीडिया पर अफवाहों और भ्रामक जानकारियों (Myths) का बाजार गर्म हो गया है। सबसे बड़ा डर यह फैलाया जा रहा है कि 'एचपीवी वैक्सीन लगाने से लड़कियां भविष्य में बांझपन (Infertility) का शिकार हो सकती हैं।' इस अफवाह के कारण कई माता-पिता अपनी बेटियों को टीका लगवाने से हिचकिचा रहे हैं। आइए, विज्ञान और तथ्यों की कसौटी पर इस दावे की सच्चाई परखते हैं।
Myth 1: एचपीवी वैक्सीन से लड़कियां बांझपन (Infertility) का शिकार हो जाती हैं?
Fact (सच): यह दावा पूरी तरह से गलत और भ्रामक है।
सोशल मीडिया पर कुछ तथाकथित स्वास्थ्य विशेषज्ञ वीडियो बनाकर यह दावा कर रहे हैं कि HPV वैक्सीन के गंभीर साइड इफेक्ट्स होते हैं, जिनमें बांझपन सबसे प्रमुख है। हालांकि, अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) सहित दुनिया की किसी भी प्रमुख स्वास्थ्य संस्था ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है।
पिछले 15 से अधिक वर्षों से दुनिया भर में लाखों लड़के और लड़कियों को एचपीवी का टीका लगाया जा चुका है। आज तक किसी भी क्लिनिकल ट्रायल या वास्तविक रिपोर्ट में ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है जहाँ यह साबित हो सके कि इस वैक्सीन ने प्रजनन क्षमता (Fertility) को नुकसान पहुंचाया है। उलटे, यह टीका सर्वाइकल कैंसर को रोककर महिलाओं के गर्भाशय और प्रजनन स्वास्थ्य की रक्षा करता है।
एचपीवी वैक्सीन के असली साइड इफेक्ट्स क्या हैं?
किसी भी सामान्य टीके की तरह, एचपीवी वैक्सीन के भी कुछ बहुत ही मामूली और अस्थायी साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं, जो एक या दो दिन में खुद ठीक हो जाते हैं। इनमें शामिल हैं:
- इंजेक्शन वाली जगह पर हल्का दर्द, सूजन या लालिमा।
- हल्का बुखार या सिरदर्द।
- थकान या जी मिचलाना।
- मांसपेशियों या जोड़ों में हल्का दर्द।
- कुछ किशोरियों में सुई के डर से चक्कर आने या बेहोशी की शिकायत हो सकती है (इसलिए टीका लगवाते समय और उसके 15 मिनट बाद तक बैठे रहने की सलाह दी जाती है)।
Myth 2: एचपीवी वैक्सीन से कैंसर का रिस्क कम नहीं होता?
Fact (सच): यह टीका सर्वाइकल कैंसर से बचाने में बेहद कारगर है।
प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल 'BMJ' में हाल ही में प्रकाशित एक बड़े अध्ययन ("Extended follow-up of invasive cervical cancer risk after quadrivalent HPV vaccination") के आंकड़े खुद गवाही देते हैं। रिसर्च में सामने आए इनवेसिव सर्वाइकल कैंसर के कुल 930 मामलों में से:
- बिना टीका लगवाए व्यक्तियों में: 833 मामले पाए गए।
- टीकाकृत (Vaccinated) व्यक्तियों में: केवल 97 मामले सामने आए।
यह डेटा स्पष्ट रूप से साबित करता है कि एचपीवी का टीका सर्वाइकल कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम कर देता है।
2030 तक सर्वाइकल कैंसर मुक्त भारत का लक्ष्य
भारत सरकार ने 28 फरवरी 2026 से इस देशव्यापी एचपीवी टीकाकरण अभियान को गति दी है। यह कदम विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के उस दृष्टिकोण के अनुरूप है जिसमें साल 2030 तक सर्वाइकल कैंसर को पूरी तरह से समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। यह हमारी बेटियों के स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। अफवाहों पर ध्यान न दें और अपनी बेटियों को समय पर यह जीवनरक्षक टीका जरूर लगवाएं।









