मुंडवा भूमि विवाद: पार्थ पवार की कंपनी पर झूठे सबूत का आरोप

पुणे: मुंडवा भूमि विवाद में बड़ा मोड़। शीतल तेजवानी ने पार्थ पवार की अमाडेआ एंटरप्राइजेज पर अदालत को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए झूठी गवाही (Perjury) के लिए कार्रवाई की मांग की है।

मुंडवा भूमि विवाद: पार्थ पवार की कंपनी पर झूठे सबूत का आरोप
मुंडवा भूमि विवाद: पार्थ पवार की कंपनी पर झूठे सबूत का आरोप

पुणे, 14 फरवरी 2026: पुणे के मुंडवा स्थित प्रमुख भूमि विवाद में एक बड़ा और महत्वपूर्ण मोड़ आया है। इस मामले की आरोपी शीतल तेजवानी ने सिविल जज सीनियर डिवीजन, पुणे के समक्ष एक कठोर याचिका दायर की है, जिसमें पार्थ पवार से जुड़ी कंपनी अमाडेआ एंटरप्राइजेज एलएलपी (Amadea Enterprises LLP) द्वारा दायर मुकदमे को तुरंत खारिज करने की मांग की गई है।

अदालत को गुमराह करने का आरोप, मांगी झूठी गवाही पर कार्रवाई

तेजवानी ने अपनी याचिका में अमाडेआ एंटरप्राइजेज पर जानबूझकर अदालत को गुमराह करने और महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने का आरोप लगाया है। उन्होंने मांग की है कि अमाडेआ एंटरप्राइजेज के खिलाफ झूठी गवाही (Perjury) की सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू की जाए।

याचिका में दावा किया गया है कि अमाडेआ एंटरप्राइजेज ने विवादित संपत्ति के संबंध में ऐसे दस्तावेज और बयान पेश किए जो तथ्यात्मक रूप से गलत थे और उनका उद्देश्य केवल अदालत से अनुकूल आदेश प्राप्त करना था। तेजवानी के अनुसार, यह कार्रवाई न्याय की प्रक्रिया का दुरुपयोग है और अदालत के प्रति अवमानना का गंभीर मामला है।

तेजवानी की कानूनी टीम ने तर्क दिया है कि चूंकि यह मुकदमा गलत और भ्रामक जानकारी पर आधारित है, इसलिए इसे सिविल प्रोसीजर कोड (CPC) के तहत खारिज किया जाना चाहिए। याचिका में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अदालत को न केवल मुकदमे को खारिज करना चाहिए, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया की पवित्रता बनाए रखने के लिए झूठी गवाही देने वाले पक्ष के खिलाफ सख्त आपराधिक कार्रवाई भी करनी चाहिए।

मुकदमे के खारिज होने का महत्व

यह घटनाक्रम पुणे के राजनीतिक और रियल एस्टेट गलियारों में हलचल मचा रहा है, क्योंकि अमाडेआ एंटरप्राइजेज का संबंध प्रमुख राजनीतिक हस्ती पार्थ पवार से है। तेजवानी की यह पहल इस बात पर ज़ोर देती है कि कोई भी पक्ष दुर्भावनापूर्ण मुकदमेबाजी (Malicious Prosecution) के माध्यम से न्यायपालिका का दुरुपयोग नहीं कर सकता।

अब सिविल जज सीनियर डिवीजन इस आवेदन पर सुनवाई करेंगे और यह तय करेंगे कि क्या अमाडेआ एंटरप्राइजेज के खिलाफ झूठी गवाही के लिए अलग से आपराधिक कार्यवाही शुरू करने की आवश्यकता है या नहीं। यह निर्णय मुंडवा भूमि विवाद की दिशा को पूरी तरह से बदल सकता है।