Nitish Kumar Rajya Sabha Inside Story: निशांत की एंट्री से शुरू हुआ "नीतीश युग" के अंत का काउंटडाउन?
बिहार की राजनीति में बड़ा भूचाल! सीएम नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना लगभग तय हो गया है। पढ़िए वह इनसाइड स्टोरी कि कैसे बेटे निशांत की राजनीति में एंट्री के बहाने बीजेपी ने रची नीतीश की विदाई की पूरी पटकथा।
Patna (Bihar): बिहार की राजनीति (Bihar Politics) हमेशा से ही अपने चौंकाने वाले फैसलों के लिए जानी जाती है, लेकिन इस बार जो होने जा रहा है, वह एक पूरे युग का अंत माना जा रहा है। 'सुशासन बाबू' के नाम से मशहूर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) का राज्यसभा (Rajya Sabha) जाना लगभग तय हो गया है। उन्होंने इसके लिए नामांकन भी दाखिल कर दिया है। लेकिन इसके पीछे की जो कहानी (Inside Story) है, वह किसी बॉलीवुड पॉलिटिकल थ्रिलर से कम नहीं है।
बेटे निशांत से शुरू हुआ 'विदाई' का खेल
विधानसभा चुनाव में नारा दिया गया था- '2025 से 2030, फिर से नीतीश कुमार', लेकिन 2030 तो दूर, अब उनके जल्द ही राज्य की राजनीति छोड़ने की चर्चाएं तेज हैं। बीजेपी सूत्रों के अनुसार, इस पूरे ऑपरेशन की पटकथा पिछले 15 दिनों से लिखी जा रही थी। इसकी शुरुआत नीतीश कुमार के बेटे निशांत (Nishant) को राजनीति और राज्यसभा भेजने के विकल्प से हुई थी।
जैसे-जैसे बातचीत आगे बढ़ी, बीजेपी आलाकमान ने महसूस किया कि यह नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से सम्मानजनक विदाई देने का सबसे सही वक्त है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कथित तौर पर सहयोगियों से कहा था कि नीतीश कुमार की सेहत (Health) चिंता का विषय है, और राज्यसभा की सीट उनके जैसे कद्दावर नेता के लिए एक शानदार विदाई हो सकती है।
इन 3 नेताओं ने नीतीश को किया तैयार
इस बड़े राजनीतिक फेरबदल के लिए सीधे तौर पर नीतीश कुमार से बात नहीं की गई। सूत्रों के मुताबिक, अमित शाह ने जदयू (JDU) के तीन वरिष्ठ नेताओं के साथ कई दौर की गुप्त बैठकें कीं:
- केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन 'ललन' सिंह
- राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा
- बिहार सरकार के मंत्री विजय कुमार चौधरी
इन बैठकों में पहले निशांत को राज्य की राजनीति में उतारने और अमित शाह से उनकी मुलाकात का खाका तैयार किया गया। इसके बाद फरवरी के आखिरी सप्ताह में इन तीनों नेताओं ने नीतीश कुमार के साथ लगातार बैठकें कीं और उन्हें राज्यसभा जाने के लिए राजी किया।
मनीष वर्मा का पत्ता साफ, परिवार बेखबर
इस पूरी रणनीति के तहत जदयू के राष्ट्रीय महासचिव मनीष वर्मा (जो नीतीश के बेहद करीब माने जाते हैं) की संभावित उम्मीदवारी को रोक दिया गया। इसके बजाय निशांत का नाम आगे किया गया। बातचीत के दौरान बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने नीतीश कुमार को उनकी 'पुरानी इच्छा' (राज्यसभा जाने की) की याद दिलाई और कहा कि अगर अभी यह सीट नहीं ली, तो अगले दो साल तक मौका नहीं मिलेगा।
हैरानी की बात यह है कि इस पूरी प्लानिंग की भनक नीतीश कुमार के परिवार तक को नहीं लगी। जब 3-4 मार्च को परिवार और करीबी मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव को यह पता चला, तब उन्होंने नीतीश को रोकने की आखिरी कोशिश की। रातभर समझाया गया, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। नीतीश नामांकन पत्र पर हस्ताक्षर कर चुके थे।
बीजेपी को इतनी जल्दी क्यों थी? (BJP's Masterplan)
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एनडीए (NDA) के अंदर यह अघोषित समझौता था कि नीतीश कुमार नई सरकार की पहली सालगिरह (सितंबर) से पहले पद छोड़ देंगे। लेकिन बीजेपी सितंबर तक का इंतजार करना "रिस्की" (Risky) मान रही थी। बीजेपी को डर था कि अगर ज्यादा समय दिया गया, तो जेडीयू (JDU) जमीन पर अपनी पकड़ और मजबूत कर लेगी और सत्ता हस्तांतरण में मुश्किलें आ सकती हैं। इसलिए, वक्त रहते ही यह मास्टरस्ट्रोक खेल दिया गया।
आगे क्या? (What's Next for Bihar?)
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबर से जेडीयू के अंदर भी खलबली मची हुई है। पार्टी तीन अलग-अलग धड़ों में बंटती नजर आ रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? क्या बीजेपी अपना सीएम बनाएगी या फिर जेडीयू के भीतर से ही कोई नया चेहरा सामने आएगा? बिहार की राजनीति का ऊंट किस करवट बैठेगा, यह आने वाले कुछ ही दिनों में साफ हो जाएगा।









