Owaisi on Jinnah & Nagpur Victory: "Main Jinnah Nahi" - AIMIM Chief's Strong Message

Asaduddin Owaisi ने नागपुर की जीत और अपने ऊपर उठ रहे सवालों पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने साफ कहा, "मैं जिन्ना नहीं हूं, मेरे बुजुर्गों ने जिन्ना को ठुकरा कर भारत को चुना था।" जानिए ओवैसी ने Nagpur Election Result और अपनी वतन-परस्ती पर और क्या कहा।

Owaisi on Jinnah & Nagpur Victory: "Main Jinnah Nahi" - AIMIM Chief's Strong Message

भारतीय राजनीति में अपने बेबाक बयानों के लिए मशहूर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने एक बार फिर सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। हाल ही में नागपुर (Nagpur) और महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में हुए निकाय चुनावों में अपनी पार्टी के प्रदर्शन और खुद पर लग रहे आरोपों का जवाब देते हुए ओवैसी ने राष्ट्रवाद और वफादारी पर एक बड़ा बयान दिया है।

ओवैसी ने अपने विरोधियों, खासकर भाजपा और संघ (RSS) पर निशाना साधते हुए स्पष्ट किया कि भारतीय मुसलमानों की वफादारी पर सवाल उठाने वालों को इतिहास पढ़ना चाहिए। उन्होंने गरजते हुए कहा, "मैं जिन्ना नहीं हूं, और न ही मैं जिन्ना की औलाद हूं। मेरे बुजुर्गों ने 1947 में ही जिन्ना के सिद्धांत को ठुकरा दिया था।"

"मैं जिन्ना नहीं, इस वतन का वफादार हूं" (I am not Jinnah, I am loyal to this nation)

ओवैसी का यह बयान उस समय आया है जब अक्सर उन्हें राजनीतिक विरोधी 'दूसरा जिन्ना' कहकर संबोधित करते हैं। नागपुर की धरती, जिसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का गढ़ माना जाता है, वहां से या उस संदर्भ में ओवैसी का यह बयान बेहद मायने रखता है।

ओवैसी ने कहा कि जब देश का बंटवारा हो रहा था, तब उनके पूर्वजों के पास पाकिस्तान जाने का विकल्प था, लेकिन उन्होंने भारत (India) को अपना वतन चुना। उन्होंने कहा:

"हमें बार-बार पाकिस्तान जाने की नसीहत देने वाले सुन लें, हमने जिन्ना की टू- नेशन थ्योरी (Two-Nation Theory) को उसी वक्त खारिज कर दिया था। हम भारत में अपनी मर्जी से रुके हैं, मजबूरी में नहीं। यह हमारा वतन है और हम यहीं जिएंगे और यहीं मरेंगे।"

ओवैसी ने जोर देकर कहा कि उनकी लड़ाई संविधान के दायरे में रहकर अपने समुदाय के अधिकारों की लड़ाई है, और इसे देशद्रोह या अलगाववाद से जोड़ना उनकी वतन-परस्ती का अपमान है।

नागपुर की जीत और महाराष्ट्र में AIMIM का उदय (Nagpur Victory & AIMIM's Rise)

ओवैसी का यह आक्रामक रुख हाल ही में महाराष्ट्र में हुए स्थानीय निकाय चुनावों (Civic Polls) के नतीजों के बाद और भी तेज हो गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, AIMIM ने महाराष्ट्र के कई शहरों में चौंकाने वाला प्रदर्शन किया है।

ओवैसी ने नागपुर की जीत (Nagpur Victory) और राज्य भर में पार्टी को मिले समर्थन पर बात करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक चुनावी जीत नहीं है, बल्कि यह इस बात का सबूत है कि मुसलमानों और दलितों ने अब अपनी खुद की 'राजनीतिक आवाज' (Political Voice) चुन ली है।

  • 125 सीटों का दावा: हालिया खबरों के अनुसार, AIMIM ने महाराष्ट्र के विभिन्न नगर निगमों में लगभग 125 सीटों पर जीत दर्ज की है, जिसमें नागपुर, मालेगांव और मुंबई के कुछ हिस्से शामिल हैं।

  • सेक्युलर पार्टियों को संदेश: ओवैसी ने कहा कि तथाकथित 'सेक्युलर' पार्टियों ने मुसलमानों का सिर्फ वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया, लेकिन नागपुर और अन्य जगहों के नतीजों ने दिखा दिया है कि अब यह समुदाय अपने हक के लिए खुद खड़ा हो सकता है।

RSS के गढ़ में ललकार (Challenge in the stronghold of RSS)

नागपुर को संघ का मुख्यालय कहा जाता है। ओवैसी ने अपने बयान में परोक्ष रूप से संघ परिवार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नागपुर किसी एक विचारधारा की जागीर नहीं है। भारत का संविधान हर नागरिक को अपनी बात रखने और चुनाव लड़ने का अधिकार देता है।

ओवैसी ने कहा, "नागपुर की जीत उन लोगों के मुंह पर तमाचा है जो सोचते थे कि हमें डराकर या किनारे करके राजनीति से बाहर कर दिया जाएगा। हम संविधान को मानने वाले लोग हैं और बाबा साहेब अंबेडकर के संविधान ने हमें यह ताकत दी है।"

असदुद्दीन ओवैसी का यह बयान साफ करता है कि वे आने वाले समय में अपनी राजनीति को और आक्रामक धार देने वाले हैं। "मैं जिन्ना नहीं हूं" कहकर उन्होंने अपनी पार्टी पर लगने वाले सांप्रदायिकता के ठप्पे को हटाने की कोशिश की है, वहीं नागपुर और महाराष्ट्र के नतीजों को ढाल बनाकर उन्होंने यह संदेश दिया है कि AIMIM अब केवल हैदराबाद तक सीमित पार्टी नहीं रही।

यह देखना दिलचस्प होगा कि ओवैसी के इस बयान पर भाजपा और अन्य राजनीतिक दलों की क्या प्रतिक्रिया होती है, लेकिन इतना तय है कि ओवैसी ने 2026 के सियासी माहौल को अभी से गरमा दिया है।