ईरान-इजराइल संघर्ष में कूदा पाकिस्तान: शहबाज शरीफ की खुली चेतावनी
ईरान पर इजरायल के हमलों के बाद पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने सऊदी क्राउन प्रिंस से बात की और इजरायली कार्रवाई को 'खतरनाक' बताया। खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ा।
मध्य पूर्व में तनाव उस समय और बढ़ गया जब ईरान पर इजरायल के भीषण हमलों के बाद पाकिस्तान भी इस संघर्ष में कूदता नजर आया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) से फोन पर लंबी बातचीत की है और इस दौरान उन्होंने इजरायली कार्रवाई की कड़ी निंदा की।
इजरायली हमलों को 'खतरनाक' बताया
शहबाज शरीफ ने ईरान पर इजरायल द्वारा किए गए हमलों को खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के लिए 'खतरनाक' करार दिया। उनकी यह टिप्पणी इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच आई है, जिसने पूरे मध्य पूर्व को एक बड़े संघर्ष के मुहाने पर ला खड़ा किया है। पाकिस्तान का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वह खुद आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है, लेकिन उसने क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर अपनी चिंता स्पष्ट कर दी है।
सूत्रों के मुताबिक, बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री शरीफ ने खाड़ी क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी ऐसी कार्रवाई से बचना चाहिए, जिससे पहले से ही अस्थिर क्षेत्र में तनाव और बढ़ जाए। पाकिस्तान ने हमेशा फिलिस्तीनी मुद्दे का समर्थन किया है और इजरायल की आक्रामक नीतियों का विरोध करता रहा है, लेकिन ईरान-इजरायल के सीधे टकराव में इस तरह का सीधा बयान देना एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक घटनाक्रम है।
सऊदी अरब के साथ पाक की कूटनीति
शहबाज शरीफ और MBS के बीच हुई इस बातचीत को पाकिस्तान की क्षेत्रीय कूटनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पाकिस्तान सऊदी अरब का एक महत्वपूर्ण सहयोगी है, और दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक रूप से मजबूत संबंध रहे हैं। ऐसे में सऊदी क्राउन प्रिंस से बातचीत करना क्षेत्र में पाकिस्तान की स्थिति को मजबूत करने और खाड़ी देशों के साथ मिलकर एक साझा रुख अपनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान का यह कदम इजरायल पर दबाव बनाने और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान इस संघर्ष के गंभीर परिणामों की ओर आकर्षित करने का प्रयास है। यह देखना दिलचस्प होगा कि पाकिस्तान के इस बयान का इजरायल और अंतरराष्ट्रीय मंच पर क्या असर होता है, खासकर तब जब पहले से ही वैश्विक शक्तियां इस क्षेत्र में शांति स्थापित करने की कोशिश कर रही हैं।









