PM Modi Inaugurates Seva Teerth: गुलामी की मानसिकता से मुक्ति, पीएम मोदी ने देश को सौंपा 'सेवा तीर्थ' और 'कर्तव्य भवन'

PM Narendra Modi inaugurated Seva Teerth and Kartavya Bhavan in New Delhi. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए PMO 'सेवा तीर्थ' और केंद्रीय सचिवालय 'कर्तव्य भवन' का उद्घाटन किया। जानिए कैसे ये इमारतें 'विकसित भारत' की नींव बनेंगी।

PM Modi Inaugurates Seva Teerth: गुलामी की मानसिकता से मुक्ति, पीएम मोदी ने देश को सौंपा 'सेवा तीर्थ' और 'कर्तव्य भवन'

'सेवा तीर्थ' और 'कर्तव्य भवन': पीएम मोदी ने की नए भारत की नई शुरुआत, कहा- अब गुलामी की सोच के लिए कोई जगह नहीं

नई दिल्ली: "रेस कोर्स रोड का नाम बदलकर लोक कल्याण मार्ग करना सिर्फ एक नाम का बदलाव नहीं था, बल्कि यह सत्ता की मानसिकता को सेवा के भाव में बदलने का प्रयास था।" इन शब्दों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार, 13 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में नए प्रधानमंत्री कार्यालय 'सेवा तीर्थ' (Seva Teerth) और केंद्रीय सचिवालय की इमारतों 'कर्तव्य भवन-1 और 2' का उद्घाटन किया।

विजया एकादशी के शुभ अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि ये इमारतें सिर्फ ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि विकसित भारत (Viksit Bharat) के संकल्प का प्रतीक हैं।

गुलामी के प्रतीकों से मुक्ति

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने औपनिवेशिक मानसिकता (Colonial Mindset) पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने याद दिलाया कि रायसीना हिल्स पर बने साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक अंग्रेजों ने भारतीयों पर राज करने के लिए बनाए थे।

  • अंग्रेजी हुकूमत का प्रतीक: पीएम ने कहा कि तत्कालीन वायसराय ने साफ कहा था कि ये इमारतें ब्रिटिश राजा की इच्छा लागू करने के लिए हैं। इन्हें जानबूझकर ऊंचाई पर बनाया गया था ताकि आम जनता खुद को छोटा महसूस करे।

  • जनता की आकांक्षाओं का केंद्र: इसके विपरीत, नया 'सेवा तीर्थ' जमीन से जुड़ा है। पीएम ने कहा, "आज सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन का निर्माण भारत के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए किया गया है। यहां लिए गए फैसले किसी राजा की सोच नहीं, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों की उम्मीदों को आगे बढ़ाएंगे।"

आधुनिक भारत की जरूरत

पीएम मोदी ने बताया कि आजादी के दशकों बाद भी भारत सरकार के मंत्रालय दिल्ली में 50 अलग-अलग जगहों से चल रहे थे। इससे न केवल 1,500 करोड़ रुपये का सालाना किराया खर्च होता था, बल्कि फाइलों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में समय और ईंधन की भी बर्बादी होती थी। नए कर्तव्य भवन में सभी मंत्रालयों को एक साथ लाया गया है, जिससे कार्यक्षमता बढ़ेगी और जनता के पैसे की बचत होगी। ये इमारतें आधुनिक तकनीक से लैस हैं, जो 21वीं सदी के भारत की गति के साथ तालमेल बिठा सकेंगी।

इतिहास को संजोना: 'युगे युगीन भारत' संग्रहालय

पुराने साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक को ध्वस्त नहीं किया जाएगा। पीएम मोदी ने घोषणा की कि इन ऐतिहासिक इमारतों को 'युगे युगीन भारत' राष्ट्रीय संग्रहालय (National Museum) में बदला जाएगा। यह संग्रहालय आने वाली पीढ़ियों को भारत के गौरवशाली इतिहास और संघर्षों की याद दिलाएगा।

'सेवा' और 'कर्तव्य': नए भारत का मंत्र

इमारतों का नामकरण 'सेवा तीर्थ' और 'कर्तव्य भवन' सरकार की कार्यसंस्कृति में आए बदलाव को दर्शाता है।

  • सेवा परमो धर्म: पीएम ने कहा कि पीएमओ का नाम 'सेवा तीर्थ' रखना यह याद दिलाता है कि शासन का मतलब अधिकार जताना नहीं, बल्कि सेवा करना है। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे जब भी इस इमारत में प्रवेश करें, तो 'नागरिक देवो भव:' (नागरिक ही देवता है) के भाव को आत्मसात करें।

  • कर्तव्य पथ पर अग्रसर: उन्होंने याद दिलाया कि राजपथ को 'कर्तव्य पथ' बनाकर सरकार ने यह संदेश दिया था कि अधिकारों से पहले कर्तव्य आता है।

2047 का विजन

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण का समापन 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य के साथ किया। उन्होंने कहा, "यह सही समय है (This is the time, the right time)।" उन्होंने विश्वास जताया कि सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन में लिया गया हर निर्णय, हर फाइल पर किया गया हस्ताक्षर, भारत के भविष्य को उज्ज्वल बनाएगा। उन्होंने सभी सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों और इंजीनियरों को इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए बधाई दी।