PM Modi Speech Skipped in Lok Sabha: President's Address Motion Passed Amid Opposition Uproar

संसदीय इतिहास में एक दुर्लभ घटना! भारी हंगामे और Opposition के विरोध के कारण PM Narendra Modi लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण का जवाब नहीं दे सके। जानिए कैसे बिना पीएम के भाषण के पास हुआ Motion of Thanks और क्या है इसके पीछे का असली कारण।

PM Modi Speech Skipped in Lok Sabha: President's Address Motion Passed Amid Opposition Uproar

भारतीय संसदीय इतिहास में 5 फरवरी, 2026 का दिन एक अभूतपूर्व और नाटकीय घटना के रूप में दर्ज हो गया है। बजट सत्र (Budget Session) के दौरान, राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव (Motion of Thanks on President's Address) पर चर्चा का समापन पारंपरिक रूप से प्रधानमंत्री के जवाब के साथ होता है। लेकिन इस बार, भारी शोर-शराबे और विपक्ष के तीखे तेवरों के चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) लोकसभा में अपना संबोधन नहीं दे सके।

विपक्ष के लगातार हंगामे के बीच, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रस्ताव को मतदान के लिए रखा, जिसे ध्वनि मत (Voice Vote) से पारित कर दिया गया। यह घटना भारतीय राजनीति में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ती खाई और कड़वाहट का एक जीवंत उदाहरण है।

क्या हुआ लोकसभा के अंदर? (What happened inside the Lok Sabha?)

गुरुवार को जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, माहौल बेहद तनावपूर्ण था। उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री मोदी दोपहर में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर हुई चर्चा का जवाब देंगे। सत्ता पक्ष के सांसद पीएम के भाषण को सुनने के लिए उत्साहित थे, वहीं विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस, अपनी मांगों को लेकर अड़ा हुआ था।

जैसे ही प्रश्नकाल समाप्त हुआ और विधायी कार्य शुरू हुए, विपक्षी सांसद 'वेल' (Well of the House) में आ गए और नारेबाजी शुरू कर दी।

  • नारेबाजी: विपक्षी सांसद "हमें न्याय चाहिए" और "तानाशाही नहीं चलेगी" के नारे लगा रहे थे।

  • मांग: उनका मुख्य विरोध विपक्ष के नेता (Leader of Opposition) राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को बोलने की अनुमति न मिलने को लेकर था।

स्पीकर ओम बिरला ने बार-बार विपक्ष से शांत होने और अपनी सीटों पर जाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, "सदन चर्चा के लिए है, नारेबाजी के लिए नहीं। प्रधानमंत्री जी जवाब देने के लिए तैयार हैं, आप उन्हें सुनिए।" लेकिन विपक्ष ने उनकी एक न सुनी। शोरगुल इतना ज्यादा था कि सदन की कार्यवाही चलाना असंभव हो गया।

पीएम मोदी क्यों नहीं बोल पाए? (Why PM Modi couldn't speak?)

आमतौर पर, प्रधानमंत्री विपक्ष के हंगामे के बीच भी अपना भाषण देते रहे हैं। लेकिन इस बार स्थिति अलग थी। विपक्ष का हंगामा इतना तीव्र और सुनियोजित था कि संसदीय मर्यादाएं तार-तार होती दिखीं।

सूत्रों के अनुसार, सरकार और स्पीकर नहीं चाहते थे कि प्रधानमंत्री का महत्वपूर्ण भाषण, जो देश की नीतियों और भविष्य की दिशा तय करता है, वह शोरगुल में दब जाए। जब यह स्पष्ट हो गया कि विपक्ष किसी भी कीमत पर पीएम को बोलने नहीं देगा, तो स्पीकर ने चर्चा को समाप्त मानते हुए सीधे 'धन्यवाद प्रस्ताव' पर मतदान करा दिया।

  • प्रस्ताव ध्वनि मत से पास हो गया।

  • इसके तुरंत बाद, स्पीकर ने सदन की कार्यवाही को दिन भर के लिए स्थगित कर दिया।

यह पिछले कई दशकों में पहली बार हुआ है जब प्रधानमंत्री लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर हुई बहस का जवाब दिए बिना ही प्रस्ताव पारित हो गया हो।

विवाद की जड़: राहुल गांधी और नरवणे की किताब (The Root Cause)

इस पूरे हंगामे की असली वजह एक दिन पहले की घटना और एक विवादास्पद किताब थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, विपक्ष इस बात से नाराज था कि राहुल गांधी को उनके भाषण के दौरान पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे (Gen. M.M. Naravane) के अप्रकाशित संस्मरण (Memoir) के कुछ हिस्सों को कोट (Quote) करने से रोक दिया गया था।

  • अग्निपथ और चीन मुद्दा: दावा किया जा रहा है कि इस किताब में 'अग्निपथ योजना' (Agnipath Scheme) और 2020 के भारत-चीन सीमा गतिरोध (China Border Standoff) को लेकर कुछ संवेदनशील खुलासे हैं।

  • संसदीय विशेषाधिकार: विपक्ष का आरोप था कि सरकार सच्चाई को दबाना चाहती है और एक चुने हुए प्रतिनिधि को संसद में बोलने से रोक रही है। इसी के विरोध में उन्होंने तय किया था कि वे प्रधानमंत्री को भी सदन में अपनी बात नहीं रखने देंगे।

2004 का बदला? (History Repeats Itself)

संसद के गलियारों में और सोशल मीडिया पर इस घटना को 2004 की घटना से जोड़कर देखा जा रहा है। कांग्रेस और विपक्षी दलों का कहना है कि उन्होंने वही किया जो भाजपा ने 2004 में किया था।

  • जून 2004: जब डॉ. मनमोहन सिंह (Dr. Manmohan Singh) पहली बार प्रधानमंत्री बने थे, तब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान भाजपा (जो उस समय विपक्ष में थी) ने इतना हंगामा किया था कि मनमोहन सिंह लोकसभा में अपना जवाब नहीं दे पाए थे। उन्हें अपना भाषण पटल (Table of the House) पर रखना पड़ा था।

  • 2026: आज 22 साल बाद, इतिहास ने खुद को दोहराया है, लेकिन पात्र बदल गए हैं। आज कांग्रेस विपक्ष में है और भाजपा सत्ता में।

राज्यसभा में क्या होगा? (What about Rajya Sabha?)

भले ही लोकसभा में प्रधानमंत्री का भाषण नहीं हो सका, लेकिन विधायी प्रक्रिया के अनुसार, उन्हें राज्यसभा (Rajya Sabha) में भी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर जवाब देना होता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पीएम मोदी राज्यसभा के मंच का उपयोग करके विपक्ष के इस व्यवहार पर करारा प्रहार करेंगे और अपनी सरकार की उपलब्धियों को देश के सामने रखेंगे।

लोकसभा में न बोल पाने की कमी वे राज्यसभा में पूरी आक्रामकता के साथ पूरी कर सकते हैं।

सत्ता पक्ष और विपक्ष की प्रतिक्रिया (Reactions)

इस घटना के बाद दोनों पक्षों की ओर से तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है।

सत्ता पक्ष (NDA): संसदीय कार्य मंत्री और भाजपा नेताओं ने विपक्ष के आचरण को "लोकतंत्र की हत्या" और "संसदीय परंपराओं का अपमान" करार दिया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास तर्कों की कमी है, इसलिए वे शोर मचाकर प्रधानमंत्री को देश से संवाद करने से रोकना चाहते हैं।

विपक्ष (INDIA Alliance): दूसरी ओर, विपक्ष ने इसे अपनी 'नैतिक जीत' बताया है। उनका कहना है कि सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों (जैसे चीन, महंगाई, रोजगार) पर जवाब देने से भाग रही है और जब विपक्ष सवाल पूछता है, तो उनका माइक बंद कर दिया जाता है या उन्हें बोलने नहीं दिया जाता।

5 फरवरी 2026 को लोकसभा में जो हुआ, वह भारतीय लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है। संसद संवाद और बहस का सर्वोच्च मंच है। जब देश का प्रधानमंत्री संसद में नहीं बोल पाता, या जब विपक्ष के नेता को अपनी बात रखने से रोका जाता है, तो अंततः नुकसान देश की जनता का होता है।

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का बिना पीएम के भाषण के पास होना तकनीकी रूप से भले ही सही हो, लेकिन लोकतांत्रिक परंपराओं के लिहाज से यह एक 'काला अध्याय' है। अब देश की निगाहें राज्यसभा पर टिकी हैं, जहाँ प्रधानमंत्री मोदी इस पूरे घटनाक्रम पर अपना पक्ष रख सकते हैं।