ट्रंप का भारत को 'सबसे बड़ा झटका', व्यापार लाभ होंगे खत्म?
अमेरिका द्वारा टैरिफ कम करने की घोषणा के बावजूद, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की नीति से प्रेरित एक बड़ा निर्णय भारत के लिए व्यापारिक लाभ समाप्त कर सकता है।
मोठी बातमी! अमेरिकी प्रशासन द्वारा हाल ही में भारत पर कुछ टैरिफ कम करने की घोषणा के बाद देश में जो अल्पकालिक खुशी थी, वह जल्द ही खत्म होने वाली है। एक नए और बेहद बड़े फैसले की आहट सुनाई दे रही है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था को एक झटके में हिलाकर रख सकती है। यह निर्णय पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति की याद दिलाता है और इसका सीधा फटका भारतीय निर्यातकों को लगेगा।
डोनाल्ड ट्रंप का सबसे बड़ा 'झटका' क्या है?
दरअसल, सूत्रों के मुताबिक अमेरिका एक बार फिर भारत को जेनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेस (GSP) प्रोग्राम से बाहर करने का मन बना रहा है। GSP वह प्रोग्राम है जिसके तहत विकासशील देशों को अमेरिका में हजारों उत्पादों पर बिना शुल्क या कम शुल्क पर निर्यात करने की अनुमति मिलती है। 2019 में ट्रंप प्रशासन ने भारत को इस लिस्ट से बाहर कर दिया था, हालांकि उसके बाद कुछ व्यापारिक सुधार हुए थे। लेकिन अब, अगर यह निर्णय दोबारा लागू होता है, तो भारत के लिए व्यापार के दरवाजे मुश्किल हो जाएंगे।
अब सिर्फ एक 'सही' और देश में भूकंप
यह पूरा मामला सिर्फ एक हस्ताक्षर (सही) से जुड़ा है। अमेरिकी राष्ट्रपति या संबंधित व्यापार प्रतिनिधि द्वारा एक बार मुहर लगाते ही, भारतीय उत्पादों पर लगने वाले टैरिफ अचानक से बढ़ जाएंगे। इस निर्णय से देश में ‘आर्थिक भूकंप’ आने की आशंका जताई जा रही है क्योंकि इसका सीधा असर कपड़ा उद्योग, रत्न और आभूषण, चमड़े के उत्पादों और कृषि निर्यात पर पड़ेगा।
क्या है GSP का महत्व?
GSP के तहत भारत को अमेरिकी बाजार में लगभग 5.6 बिलियन डॉलर मूल्य के उत्पादों पर शुल्क में छूट मिलती थी। इस छूट के हटने का मतलब है कि भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में महंगे हो जाएंगे, जिससे वे अन्य प्रतिस्पर्धी देशों (जैसे वियतनाम, बांग्लादेश, या चीन) के उत्पादों के मुकाबले टिक नहीं पाएंगे।
हाल के दिनों में भारत-अमेरिका व्यापार संबंध सुधरते दिख रहे थे, लेकिन यह संभावित फैसला द्विपक्षीय व्यापार वार्ता के भविष्य पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।
ट्रंप की नीति का साया
भले ही यह फैसला मौजूदा अमेरिकी प्रशासन ले रहा हो, लेकिन इसकी जड़ें डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शुरू की गई संरक्षणवादी (Protectionist) व्यापार नीतियों में हैं। ट्रंप हमेशा से ही व्यापार घाटे को कम करने और ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति पर ज़ोर देते रहे हैं। इस संभावित कदम को भारत के खिलाफ एक बड़ा व्यापारिक दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। भारत को अब कूटनीतिक स्तर पर तत्काल सक्रिय होना होगा ताकि इस बड़े आर्थिक झटके से बचा जा सके।









