हिमाचल: चुनी हुई सरकार को काम नहीं करने दे रहा हाईकोर्ट, SC नाराज़
स्थानीय निकाय चुनाव में दखल पर सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल हाईकोर्ट को कड़ी फटकार लगाई है। CJI की पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट चुनी हुई सरकार को काम नहीं करने दे रहा।
नई दिल्ली: देश की शीर्ष अदालत, सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की कार्यशैली पर गंभीर नाराजगी व्यक्त की है। स्थानीय निकायों के चुनावों को लेकर हाईकोर्ट द्वारा राज्य सरकार के फैसलों में बार-बार दखल देने पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी चेतावनी जारी की। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि हाईकोर्ट चुनी हुई सरकार को ठीक से काम नहीं करने दे रहा है, जो न्यायिक शक्तियों के दुरुपयोग का मामला है।
हिमाचल सरकार को मिली बड़ी राहत, चुनाव की तारीख बढ़ी
दरअसल, यह पूरा मामला हिमाचल प्रदेश में स्थानीय निकायों के चुनावों की समय सीमा से जुड़ा हुआ है। हाईकोर्ट ने चुनावों में अनावश्यक देरी को लेकर राज्य सरकार पर दबाव बनाया हुआ था और जल्द चुनाव कराने का आदेश दिया था। राज्य सरकार ने प्रशासनिक चुनौतियों का हवाला देते हुए इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए हिमाचल सरकार को बड़ी राहत दी। कोर्ट ने चुनावों के लिए निर्धारित समय सीमा को बढ़ा दिया है। अब यह चुनाव 31 मई, 2026 तक आयोजित किए जाएंगे। यह फैसला राज्य सरकार के लिए एक बड़ी जीत है, क्योंकि उसे प्रशासनिक और लॉजिस्टिक तैयारियों के लिए पर्याप्त समय मिल गया है।
‘चुनी हुई सरकार को काम करने दें’: SC ने हाईकोर्ट को दी चेतावनी
राहत देने के साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए। सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि न्यायपालिका को चुनी हुई सरकार के प्रशासनिक कार्यों में इस तरह से दखल नहीं देना चाहिए, जिससे सरकार का कामकाज प्रभावित हो।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने नाराजगी जताते हुए कहा, “हाईकोर्ट चुनी हुई सरकार को काम नहीं करने दे रहा है। अगर हाईकोर्ट हर प्रशासनिक फैसले में दखल देगा, तो सरकार अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियां कैसे निभाएगी?” सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को भविष्य में ऐसे मामलों में संयम बरतने की कड़ी चेतावनी भी दी है।
कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला न केवल हिमाचल सरकार को राहत देता है, बल्कि यह न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच की सीमाओं को भी स्पष्ट करता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया है कि हाईकोर्ट को राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) जैसे संवैधानिक निकायों के काम में हस्तक्षेप करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।









