Khamenei Missing: ट्रम्प के डर से अंडरग्राउंड हुए खामेनेई या बड़ी जंग की तैयारी? सालों बाद मिलिट्री मीटिंग से नदारद
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) पहली बार वायु सेना की अहम बैठक में शामिल नहीं हुए। क्या यह Donald Trump के हमले का डर है या किसी बड़े परमाणु धमाके की तैयारी? जानिए ईरान के अंदर चल रही इस बड़ी हलचल का पूरा सच।
Khamenei Absent: क्या ट्रम्प के खौफ से छिपे हैं 'सुप्रीम लीडर'? वर्षों बाद सैन्य बैठक से बनाई दूरी
ईरान (Iran) की राजनीति और सेना के लिए अयातुल्लाह अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) का एक शब्द ही कानून होता है। 85 वर्षीय सुप्रीम लीडर जब भी सामने आते हैं, तो दुनिया की नजरें उन पर होती हैं। लेकिन इस बार, एक ऐसा वाक्या हुआ है जिसने वाशिंगटन (Washington) से लेकर तेल अवीव (Tel Aviv) तक हड़कंप मचा दिया है।
न्यूज़24 की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्षों में पहली बार ऐसा हुआ है जब खामेनेई वायु सेना (Air Force) के कमांडरों के साथ होने वाली अपनी पारंपरिक और महत्वपूर्ण बैठक में शामिल नहीं हुए। उनकी कुर्सी खाली रही। इस गैर मौजूदगी ने कई सवालों को जन्म दे दिया है क्या खामेनेई बीमार हैं? क्या उन्हें डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) के हमले का डर सता रहा है? या फिर वे पर्दे के पीछे किसी ऐसी जंग की तैयारी कर रहे हैं जो दुनिया को दहला देगी?
परंपरा का टूटना: क्यों अहम थी यह बैठक?
यह कोई आम बैठक नहीं थी। हर साल यह बैठक 1979 की इस्लामी क्रांति (Islamic Revolution) के उस ऐतिहासिक दिन की याद में होती है जब वायु सेना के अधिकारियों ने अयातुल्लाह खुमैनी के प्रति वफादारी की कसम खाई थी। इसे 'होमाफरान निष्ठा' (Homafaran Allegiance) कहा जाता है।
दशकों से खामेनेई इस दिन खुद मौजूद रहकर सेना का मनोबल बढ़ाते आए हैं। इस बार उनका न आना 'रेड अलर्ट' (Red Alert) जैसा है। जानकारों का मानना है कि सुप्रीम लीडर का इस तरह गायब होना सामान्य नहीं है।
थ्योरी 1: 'ट्रम्प फोबिया' और जान का खतरा
सबसे बड़ी चर्चा यह है कि खामेनेई को अपनी जान का खतरा सता रहा है।
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ट्रम्प की वापसी का डर: अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प की बढ़ती सक्रियता और पुरानी दुश्मनी किसी से छिपी नहीं है। 2020 में कासिम सुलेमानी (Qasem Soleimani) की हत्या का आदेश ट्रम्प ने ही दिया था।
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सुरक्षित बंकर: सूत्रों का दावा है कि मोसाद (Mossad) और सीआईए (CIA) की पहुंच से बचने के लिए खामेनेई को किसी गुप्त 'अंडरग्राउंड बंकर' (Underground Bunker) में शिफ्ट कर दिया गया है। हो सकता है कि उन्हें खुफिया इनपुट मिला हो कि किसी बड़े कार्यक्रम में उन पर ड्रोन या मिसाइल हमला हो सकता है।
थ्योरी 2: क्या खामेनेई गंभीर रूप से बीमार हैं?
85 साल की उम्र में स्वास्थ्य का बिगड़ना कोई बड़ी बात नहीं है। पिछले कुछ समय से उनकी सेहत को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं।
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उत्तराधिकारी की जंग: अगर खामेनेई वाकई बीमार हैं, तो तेहरान में सत्ता संघर्ष (Power Struggle) शुरू हो चुका होगा। उनके बेटे मोजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) और अन्य दावेदारों के बीच कुर्सी की लड़ाई तेज हो गई होगी। शासन नहीं चाहता कि दुश्मन को लीडर की कमजोरी का पता चले, इसलिए उन्हें जनता की नजरों से दूर रखा जा रहा है।
थ्योरी 3: बड़ी जंग या परमाणु परीक्षण की तैयारी?
तीसरी और सबसे खतरनाक संभावना यह है कि यह 'खामोशी' किसी तूफान से पहले की है।
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न्यूक्लियर ब्रेकआउट (Nuclear Breakout): पश्चिमी देशों की खुफिया एजेंसियां लगातार चेतावनी दे रही हैं कि ईरान परमाणु बम बनाने के बेहद करीब है। क्या खामेनेई दुनिया की नजरों से दूर रहकर अंतिम आदेश (Final Order) देने की तैयारी कर रहे हैं?
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सैन्य पुनर्गठन: कुद्स फोर्स (Quds Force) के कमांडर इस्माइल कानी (Esmail Qaani) को लेकर भी पिछले दिनों काफी रहस्य बना रहा था। हो सकता है कि खामेनेई सेना के भीतर मौजूद 'गद्दारों' और जासूसों की सफाई (Purge) में व्यस्त हों। वे नहीं चाहते कि उनकी कोई भी योजना लीक हो।
ईरान का संदेश: 'हम तैयार हैं'
खामेनेई की गैर मौजूदगी का एक मनोवैज्ञानिक पहलू भी है। वे शायद अपनी सेना को यह संदेश देना चाहते हैं कि "मेरे बिना भी लड़ने के लिए तैयार रहो।" ईरान इस समय चारों तरफ से घिरा हुआ है गाजा में हमास कमजोर पड़ रहा है, लेबनान में हिजबुल्लाह पर दबाव है। ऐसे में सुप्रीम लीडर का गायब होना या तो डर की निशानी है या फिर एक बहुत ही सोची समझी रणनीतिक चाल (Strategic Move)।
अयातुल्लाह खामेनेई का बैठक से नदारद होना महज एक घटना नहीं, बल्कि मध्य पूर्व (Middle East) के बदलते समीकरणों का संकेत है। चाहे वजह ट्रम्प का खौफ हो या परमाणु बम की तैयारी, एक बात तय है ईरान में कुछ बड़ा पक रहा है। और जब तक खामेनेई दोबारा कैमरे के सामने नहीं आते, दुनिया की सांसें थमी रहेंगी। उनकी यह अनुपस्थिति शांति का नहीं, बल्कि आने वाले खतरे का सायरन है।









