MP में EOW छापे की भनक लगते ही दफ्तर से भागे अधिकारी-कर्मचारी

मध्य प्रदेश में वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए पहुंची EOW टीम। भनक लगते ही दफ्तर छोड़कर भागे अधिकारी-कर्मचारी, टीम ने 4 घंटे तक किया इंतजार।

MP में EOW छापे की भनक लगते ही दफ्तर से भागे अधिकारी-कर्मचारी
MP में EOW छापे की भनक लगते ही दफ्तर से भागे अधिकारी-कर्मचारी

मध्य प्रदेश में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की टीम जब वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत पर जांच के लिए एक सरकारी दफ्तर पहुंची, तो कुछ ऐसा हुआ जिसकी शायद ही किसी ने कल्पना की होगी। EOW के पहुंचने की भनक लगते ही दफ्तर में मौजूद सभी अधिकारी और कर्मचारी अपना काम छोड़कर मौके से फरार हो गए। टीम को घंटों तक इंतजार करना पड़ा, लेकिन कोई वापस नहीं लौटा।

मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना मध्य प्रदेश के एक जिले में सामने आई है, जहां वित्तीय गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इन शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए EOW की एक विशेष टीम जांच के लिए अचानक संबंधित दफ्तर पहुंची। टीम को उम्मीद थी कि वे वहां मौजूद दस्तावेजों और कर्मचारियों से पूछताछ कर मामले की तह तक पहुंच पाएंगे।

हालांकि, जैसे ही EOW की टीम ने दफ्तर में कदम रखा और अपनी पहचान बताई, वहां हड़कंप मच गया। पलक झपकते ही अधिकारी और कर्मचारी अपनी कुर्सियां छोड़कर इधर-उधर भागने लगे। कुछ ही देर में पूरा दफ्तर खाली हो गया। EOW की टीम को वहां कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति नहीं मिला जिससे वे पूछताछ कर सकें या आवश्यक दस्तावेज जब्त कर सकें।

जांच टीम ने करीब चार घंटे तक दफ्तर में इंतजार किया, इस उम्मीद में कि कोई तो वापस लौटेगा, लेकिन उनका इंतजार व्यर्थ गया। एक भी अधिकारी या कर्मचारी इतने समय तक नहीं लौटा। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को उजागर कर दिया है। अधिकारियों और कर्मचारियों का इस तरह मौके से भागना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है कि आखिर वे किस बात से डर रहे थे और कौन सी जानकारियां छिपाना चाहते थे।

EOW ने अब इस मामले में आगे की कार्रवाई की रणनीति तैयार की है। ऐसी स्थिति में, टीम अब फरार हुए अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने और दफ्तर के रिकॉर्ड्स को सील करने जैसे कदम उठा सकती है। यह घटना दर्शाती है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में अभी भी लंबी दूरी तय करनी है और कुछ अधिकारी-कर्मचारी किस हद तक कानून से बचने की कोशिश कर सकते हैं।