Nuclear War: अगर परमाणु युद्ध हुआ तो दुनिया में सिर्फ ये 2 देश बचेंगे, 5 अरब लोगों की होगी मौत!

तीसरे विश्व युद्ध और परमाणु हमलों की आहट के बीच एक डरावनी स्टडी सामने आई है। वैज्ञानिकों का दावा है कि अगर दुनिया में परमाणु युद्ध (Nuclear War) छिड़ता है, तो पृथ्वी पर 10 साल तक भयानक बर्फबारी होगी और 5 अरब से ज्यादा लोग मारे जाएंगे। केवल 2 ही देश ऐसे हैं जहां जीवन बच सकेगा।

Nuclear War: अगर परमाणु युद्ध हुआ तो दुनिया में सिर्फ ये 2 देश बचेंगे, 5 अरब लोगों की होगी मौत!
A high-quality, realistic conceptual illustration of a post-apocalyptic globe. Most of the Earth is covered in thick, dark grey smoke and ice (Nuclear Winter). Only the landmasses of Australia and New Zealand are shown glowing faintly with warmth or greenery, highlighting them as the sole survival zones. Cinematic lighting, highly detailed, dramatic and informative style.

New Delhi: दुनिया इस समय बारूद के ढेर पर बैठी है। अमेरिका, इज़राइल और ईरान (Iran-America War) के बीच बढ़ता तनाव, रूस-यूक्रेन का 4 साल से जारी युद्ध, और चीन-ताइवान का विवाद तीसरे विश्व युद्ध (World War 3) की आहट दे रहे हैं। दुनिया भर में इस वक्त लगभग 12 हजार परमाणु मिसाइलें (Nuclear Missiles) मौजूद हैं। अगर इनमें से कुछ का भी इस्तेमाल हुआ, तो अंजाम बेहद खौफनाक होगा।

परमाणु युद्ध हुआ तो क्या होगा?

वैज्ञानिकों के अनुसार, यदि परमाणु बम फटता है, तो 10 करोड़ डिग्री सेल्सियस तापमान के आग के गोले उठेंगे, जिससे पलक झपकते ही लाखों लोग राख बन जाएंगे। रेडिएशन (Radiation) के कारण त्वचा जल जाएगी, कैंसर और अंधापन फैलेगा। शहर और जंगल पूरी तरह जलकर खाक हो जाएंगे।

[Image of post-apocalyptic earth covered in smoke and ash from space]

इस भीषण तबाही से वातावरण में 15 करोड़ टन धुआं और कालिख (Soot) जमा हो जाएगी, जो सूरज की रोशनी को पृथ्वी तक पहुंचने से रोक देगी। इसके परिणामस्वरूप पूरी पृथ्वी पर 'परमाणु शीत' (Nuclear Winter) शुरू हो जाएगा।

'न्यूक्लियर विंटर' के खौफनाक परिणाम

यह 'परमाणु शीत' या न्यूक्लियर विंटर करीब 10 सालों तक चलेगा। पूरी पृथ्वी पर बर्फबारी होगी। अमेरिका और रूस जैसे हिस्सों में तापमान -20 से -30 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाएगा।

  • ओजोन परत (Ozone layer) नष्ट हो जाएगी, जिससे सूर्य की हानिकारक अल्ट्रावायलेट किरणें (UV Rays) सीधे धरती पर पड़ेंगी।
  • बारिश में 90% तक की कमी आएगी और भयंकर सूखा पड़ेगा।
  • सूरज की रोशनी न होने से पौधों में प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) रुक जाएगा और दुनिया की पूरी कृषि व्यवस्था तबाह हो जाएगी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, विस्फोट और रेडिएशन से शुरुआत में ही करीब 5 अरब लोग मारे जाएंगे। जो बचेंगे, वे भुखमरी (Starvation) और ठंड के कारण दम तोड़ देंगे।

सिर्फ ये 2 देश बचेंगे (Safe Countries)

प्रतिष्ठित 'नेचर' (Nature) जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी और परमाणु युद्ध विशेषज्ञ एनी जैकबसन (Annie Jacobsen) के अनुसार, इस महाविनाश में केवल दो देश ही बचने की उम्मीद है - ऑस्ट्रेलिया (Australia) और न्यूजीलैंड (New Zealand)

ये क्यों बचेंगे?

ये दोनों देश भौगोलिक दृष्टि से अन्य महाद्वीपों से काफी दूर और अलग-थलग हैं। समुद्र के प्रभाव के कारण यहां का तापमान बहुत ज्यादा नहीं गिरेगा, जिससे कुछ हद तक खेती (Agriculture) संभव हो सकेगी। हालांकि, विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि भले ही ये देश बच जाएं, लेकिन यहां भी जीवन बिल्कुल आसान नहीं होगा। बचे हुए लोगों को अंधेरे में और रेडिएशन से बचने के लिए अंडरग्राउंड बंकरों में रहना पड़ेगा।