IEA का बड़ा कदम: 40 करोड़ बैरल तेल के बाद भी $100 पार क्रूड
IEA ने तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए 40 करोड़ बैरल रिलीज करने का फैसला किया, फिर भी ब्रेंट क्रूड $100 के पार निकल गया। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
ग्लोबल ऑयल मार्केट में मची हलचल
ग्लोबल ऑयल मार्केट में इस समय भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने दुनिया भर में तेल की कीमतों को काबू में करने के लिए अपने स्ट्रैटजिक रिजर्व से 40 करोड़ बैरल तेल रिलीज करने का ऐतिहासिक फैसला किया है। हालांकि, इस बड़े कदम के बावजूद कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने के बजाय तेजी देखी जा रही है।
ब्रेंट क्रूड $100 के पार
बाजार के जानकारों को उम्मीद थी कि इतनी बड़ी मात्रा में तेल की आपूर्ति से कीमतें गिरेंगी, लेकिन इसके विपरीत ब्रेंट क्रूड 7 फीसदी तक उछलकर 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया है। वहीं, WTI क्रूड भी 94 डॉलर के करीब कारोबार कर रहा है।
कीमतें बढ़ने की मुख्य वजह
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने सप्लाई चेन को लेकर वैश्विक बाजार में डर पैदा कर दिया है। युद्ध जैसी स्थितियों के कारण निवेशक डरे हुए हैं, जिससे मांग और आपूर्ति का संतुलन बिगड़ गया है। यह दूसरी बार है जब मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव के चलते तेल की कीमतें इस स्तर पर पहुंची हैं। IEA का हस्तक्षेप फिलहाल बाजार की घबराहट को शांत करने में नाकाम साबित हो रहा है।
क्या होगा आगे का असर?
अगर तेल की कीमतें इसी तरह 100 डॉलर के ऊपर बनी रहती हैं, तो भारत जैसे आयात निर्भर देशों के लिए मुद्रास्फीति (Inflation) का खतरा बढ़ सकता है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से माल ढुलाई महंगी होगी, जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा।









