Delhi Rithala Fire: रिठाला मेट्रो स्टेशन के पास 80 झुग्गियां जलकर खाक, मची अफरा-तफरी
दिल्ली के रिठाला मेट्रो स्टेशन के पास गुरुवार तड़के झुग्गियों में भीषण आग लग गई, जिसमें 80 झोपड़ियां जलकर खाक हो गईं। दमकल की 15 गाड़ियों ने आग पर काबू पाया। राहत और बचाव कार्य की पूरी जानकारी पढ़ें।
नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली से एक बार फिर आगजनी की बेहद डरावनी खबर सामने आई है। गुरुवार, 5 मार्च 2026 की तड़के दिल्ली के बाहरी इलाके में स्थित रिठाला मेट्रो स्टेशन (Rithala Metro Station) के पास बसी एक झुग्गी-झोपड़ी बस्ती में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते इस आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और लगभग 70 से 80 झुग्गियों को पूरी तरह जलाकर राख कर दिया।
गनीमत यह रही कि इस खौफनाक हादसे में अब तक किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है, लेकिन दर्जनों गरीब परिवारों के सिर से छत छिन गई है और उनकी जीवन भर की जमा-पूंजी जलकर खाक हो गई है।
सुबह 4 बजे का खौफनाक मंजर
जानकारी के मुताबिक, यह आग सुबह करीब 4:15 बजे लगी। उस वक्त बस्ती के ज्यादातर लोग गहरी नींद में सो रहे थे। झुग्गियों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक, तिरपाल, सूखी लकड़ी और गत्ते जैसे ज्वलनशील पदार्थों के कारण आग ने बेहद कम समय में पूरी बस्ती को अपनी चपेट में ले लिया।
जैसे ही लोगों को आग की तपिश और धुएं का अहसास हुआ, पूरी बस्ती में चीख-पुकार मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए बदहवास होकर सुरक्षित ठिकानों की ओर भागने लगे। अंधेरा होने के कारण हालात और भी ज्यादा खौफनाक हो गए थे। लोग अपने बच्चों और बुजुर्गों को गोद में उठाकर भागते हुए नजर आए। स्थानीय लोगों के मुताबिक, आग की लपटें इतनी ऊंची थीं कि उन्हें काफी दूर से देखा जा सकता था।
दमकल विभाग की त्वरित कार्रवाई
आग लगने की सूचना मिलते ही दिल्ली दमकल विभाग (Delhi Fire Services - DFS) तुरंत हरकत में आया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दमकल की लगभग 15 गाड़ियों को तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना किया गया।
झुग्गी बस्ती की संकरी और भीड़भाड़ वाली गलियों के कारण दमकलकर्मियों को मौके तक पहुंचने और आग बुझाने के अभियान में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। हालांकि, दमकलकर्मियों की सूझबूझ और कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार आग पर काबू पा लिया गया। आग बुझने के बाद भी दमकल की टीमें 'कूलिंग ऑपरेशन' चलाती रहीं ताकि मलबे में दबी कोई चिंगारी फिर से आग न पकड़ ले।
राहत की बात: कोई जनहानि नहीं
इस भयानक हादसे में सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि किसी भी इंसान की जान नहीं गई है और न ही किसी के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना है। हालांकि, एहतियात के तौर पर दमकलकर्मी और पुलिस प्रशासन की टीमें जले हुए मलबे में गहन तलाशी अभियान चला रही हैं, ताकि किसी के फंसे होने की आशंका को पूरी तरह से खारिज किया जा सके।
भले ही इस हादसे में किसी की जान न गई हो, लेकिन आर्थिक रूप से यह एक बड़ी त्रासदी है। इन 80 झुग्गियों में रहने वाले दिहाड़ी मजदूर, कूड़ा बीनने वाले और घरेलू कामगारों की जिंदगी भर की कमाई, जरूरी दस्तावेज, कपड़े और राशन सब कुछ जलकर राख हो गया है। पीड़ित परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है।
प्रशासन का रुख और राहत कार्य
घटना के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुंच गए। इलाके में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। प्रशासन ने बेघर हुए प्रभावित परिवारों के लिए फौरी तौर पर राहत और सहायता की व्यवस्था शुरू कर दी है। उनके लिए अस्थायी टेंट, भोजन और पीने के पानी का इंतजाम किया जा रहा है। राजस्व विभाग की टीमें नुकसान का आकलन करने में जुट गई हैं, ताकि पीड़ितों को जल्द से जल्द सरकारी मुआवजा प्रदान किया जा सके। फिलहाल आग लगने के सटीक कारणों का पता नहीं चल पाया है और पुलिस मामले की जांच कर रही है।
पहले भी दहला है रिठाला
गौरतलब है कि रिठाला इलाके में झुग्गियों में आग लगने की यह कोई पहली घटना नहीं है। कुछ ही महीने पहले, नवंबर 2025 में भी रिठाला मेट्रो स्टेशन के पास बंगाली बस्ती में एक भीषण आग लगी थी, जिसमें 400 से 500 झुग्गियां जलकर खाक हो गई थीं और एक व्यक्ति की दर्दनाक मौत भी हुई थी। लगातार हो रहे ऐसे हादसे इस बात की ओर इशारा करते हैं कि अवैध रूप से खींचे गए बिजली के तार, असुरक्षित सिलेंडर और घनी आबादी इन बस्तियों को एक 'बारूद के ढेर' में तब्दील कर चुके हैं।
रिठाला की यह घटना एक बार फिर शहरी गरीबों की असुरक्षित जीवन स्थितियों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। आग बुझाने के साथ-साथ अब जरूरत इस बात की है कि इन गरीब परिवारों के सुरक्षित पुनर्वास के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में इस तरह की त्रासदियों को रोका जा सके।







