वक़्त गुज़र गया, यादें नहीं.
गुज़रे लम्हों की याद
मेरे ज़हन में महफ़ूज़ हैं बीते हुए वक़्त की हर एक याद,
आज भी दिल के किसी कोने में बसी है तेरी हर एक बात।
हम आज भी गिनते हैं उन लम्हों को,
जो कभी तेरे साथ गुज़रे थे,
वो हँसी, वो बातें, वो ख़ामोशियाँ,
जिनमें हम एक-दूसरे के बेहद क़रीब थे।
वक़्त गुज़र गया, मौसम बदल गए,
रास्ते भी जाने कहाँ से कहाँ निकल गए,
मगर कुछ यादें ऐसी होती हैं
जो वक़्त के साथ धुंधली नहीं होतीं।
कभी तन्हाई में जब बीते दिनों का ख़याल आता है,
तो दिल फिर उसी दौर में लौट जाता है,
जहाँ न कोई शिकवा था, न कोई फ़ासला,
बस तू था, मैं था और मोहब्बत का सिलसिला।
हमने तो उन लम्हों को आज भी सीने से लगा रखा है,
तेरी यादों को अपनी दुनिया में सजा रखा है।
तू साथ नहीं है, फिर भी एहसास तेरा बाक़ी है,
मेरी हर ख़ामोशी में आज भी आवाज़ तेरी बाक़ी है।
शायद यही मोहब्बत की सबसे ख़ूबसूरत सज़ा है—
इंसान दूर चला जाता है,
मगर उसकी यादें उम्र भर दिल के पास रहती हैं।
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